गुर्दे की पथरी लक्षण कारण प्रकार और उपचार

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गुर्दे की पथरी (Kidney Stones) यह तब होती है जब मूत्र मार्ग में मौजूद खनिज और लवण एक साथ मिलकर ठोस क्रिस्टल का निर्माण करते हैं। कभी कभी ये छोटे कण बिना किसी समस्या के शरीर से बाहर निकल जाते हैं लेकिन जब पथरी बड़ी हो जाती है, तो यह मूत्र मार्ग में अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं जिससे असहनीय दर्द और समस्या उत्पन्न हो सकती है।

गुर्दे की पथरी के लक्षण (Kidney stone Symptoms)

गुर्दे की पथरी के लक्षण इसके आकार, स्थान और मूत्रमार्ग में अवरोध पर निर्भर करता है कुछ मामलों में छोटी पथरी बिना कोई  लक्षणों के निकल जाते हैं, लेकिन बड़ी पथरी कई सारीं समस्याएं उत्पन्न कर सकती हैं :-

🔸तेज दर्द – पीठ, कमर, पेट के निचले हिस्से या जांघों में चुभन भरा दर्द, यह अचानक शुरू होता है और यह दर्द असहनीय भी हो सकता है।

🔸 पेशाब में रक्त – लाल, गुलाबी या भूरे रंग का पेशाब, जो रक्तस्राव का संकेत हो सकता है।

🔸 मूत्र/पेशाब मार्ग में जलन – पेशाब करने में जलन और असहज महसूस होना। 

🔸 पेशाब में रुकावट या बदबूदार होना – बार बार पेशाब की इच्छा लेकिन पेशाब का ठीक से ना होना संक्रमण की संभावना को दर्शाता है।ओके

🔸मतली एवं उल्टी – दर्द के साथ बार बार उल्टी होना पाचन तंत्र पर प्रभाव पड़ सकता हैं।

गुर्दे की पथरी बनने के कारण

गुर्दे की पथरी बनने के कई संभावित कारण हो सकते हैं, 

जैसे :–

पानी की कमी – अपर्याप्त पानी पीने से मूत्र में खनिजों का घनत्व बढ़ जाता है, जिससे पथरी बनने की संभावना अधिक हो जाती है।

आहार संबंधी कारक – अत्यधिक नमक, प्रोटीन, ऑक्सालेट और कैल्शियम वाले आहार से पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है।

वंशानुगत प्रवृत्ति – यदि परिवार में किसी को पहले पथरी हो चुकी है, तो अगली पीढ़ी में इसका खतरा बढ़ सकता है।

मूत्र संक्रमण (UTI) – संक्रमण के कारण बैक्टीरिया पथरी निर्माण को बढ़ावा दे सकते हैं।

लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहना – शारीरिक गतिविधि की कमी से गुर्दों में क्रिस्टल बनने की संभावना बढ़ जाती है।

गुर्दे की पथरी के प्रकार:–

गुर्दे की पथरियाँ अलग-अलग कारणों और संरचनाओं के आधार पर विभिन्न प्रकार की हो सकती हैं:

1. कैल्शियम ऑक्सालेट पथरी (Calcium Oxalate Stones)

➡ सबसे आम प्रकार की पथरी, जो ऑक्सालेट और कैल्शियम के संयोजन से बनती है।

➡ पालक, चाय, चॉकलेट, नट्स, और सोयाबीन में ऑक्सालेट अधिक पाया जाता है।

➡ अधिक सोडियम और कम पानी का सेवन इस प्रकार की पथरी का जोखिम बढ़ा सकता है।

2. यूरिक एसिड पथरी (Uric Acid Stones)

➡ मांसाहारी भोजन में पाए जाने वाले प्यूरिन (Purine) के अधिक सेवन से बनने वाली पथरी।

➡ गाउट (Gout) और डायबिटीज के रोगियों में इसका खतरा ज्यादा होता है।

3. स्ट्रूवाइट पथरी (Struvite Stones)

➡ मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) से बनने वाली पथरी, जो तेजी से बढ़ सकती है।

➡ यह अक्सर बिना लक्षणों के बड़ी हो जाती है और गुर्दे को नुकसान पहुँचा सकती है।

4. सिस्टीन पथरी (Cystine Stones)

➡ एक दुर्लभ प्रकार की पथरी, जो वंशानुगत चयापचय विकार के कारण बनती है।

➡ यह उन लोगों में पाई जाती है, जिनके गुर्दे अत्यधिक मात्रा में सिस्टीन (Cystine) नामक अमीनो एसिड का स्राव करते हैं।

गुर्दे की पथरी का उपचार

1. पर्याप्त जल सेवन: दिनभर में 8-12 गिलास पानी पीने से मूत्र पतला रहता है और पथरी बनने की संभावना कम होती है।

✅ 2. दर्द निवारक दवाएं: इबुप्रोफेन, नेप्रोक्सेन या पैरासिटामोल जैसी दवाएं दर्द को कम करने में सहायक होती हैं।

3. औषधीय उपचार:

अल्फा-ब्लॉकर दवाएं (Tamsulosin) – मूत्रमार्ग को चौड़ा कर पथरी को बाहर निकालने में मदद करती हैं।

पोटेशियम साइट्रेट – मूत्र को क्षारीय बनाकर पथरी के घुलने की प्रक्रिया को तेज करता है।

4. शल्य चिकित्सा (Surgical Procedures):

यदि पथरी 5-7 मिमी से बड़ी हो और प्राकृतिक रूप से बाहर न निकले, तो निम्नलिखित प्रक्रियाएँ अपनाई जाती हैं:

🔹 शॉक वेव लिथोट्रिप्सी (SWL) – ध्वनि तरंगों से पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ना।

🔹 यूरेरोस्कोपी (Ureteroscopy) – एंडोस्कोप द्वारा पथरी को निकालना या लेजर से नष्ट करना।

🔹 पर्क्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (PCNL) – बड़ी पथरी को निकालने के लिए एक छोटा चीरा लगाना

5. आयुर्वेदिक औषधीय उपचार

यदि पथरी 5-7 मिमी हैं तो आप Rijilok Wellness  का Rijiherb STN, Alov, PT, Triphala का उपयोग 3 से 6 महीने उपयोग करके गुर्दे की पथरी से निजात पा सकते हैं 

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गुर्दे की पथरी से बचाव के उपाय

✔ रोजाना 2.5-3 लीटर पानी पिएं।

✔ नमक और शक्कर का सेवन कम करें।

✔ पालक, चाय, चॉकलेट, और नट्स जैसे उच्च ऑक्सालेट वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करें।

✔ मांसाहार का सीमित सेवन करें और शाकाहारी आहार अपनाएं।

✔ रोजाना व्यायाम और योग करें।

गुर्दे की पथरी एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली समस्या है। सही आहार, पर्याप्त पानी और नियमित व्यायाम से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। यदि लक्षण नजर आएं, तो बिना देरी किए चिकित्सक से सलाह लें और उचित उपचार करवाएं।

💡 स्वस्थ गुर्दे, स्वस्थ जीवन! 💡


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